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10.95.17
अ॒न्त॒रि॒क्ष॒प्रां रज॑सो वि॒मानी॒मुप॑ शिक्षाम्यु॒र्वशीं॒ वसि॑ष्ठः । उप॑ त्वा रा॒तिः सु॑कृ॒तस्य॒ तिष्ठा॒न्नि व॑र्तस्व॒ हृद॑यं तप्यते मे ॥ (१७)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.95.17 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
पुरूरवा ने कहा-“अंतरिक्ष को पूर्ण करने वाली एवं जल का निर्माण करने वाली उर्वशी को अतिशय वासदाता पुरूरवा (मैं) वश में करता हूं. शोभन कर्म वाला पुरूरवा तुम्हारे पास रहे. मेरा हृदय तप्त हो रहा है. तुम लौट आओ. (१७)
EN English Translation
Pururva said, "I subdue Urvashi, who completes space and creates water, very much. Shobhan Karma Wala Pururva stay with you. My heart is heating up. You come back. (17)