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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 96 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 96 • ऋचा / मन्त्र 9

10.96.9

Mantra ID: 10.96.9

स्रुवे॑व॒ यस्य॒ हरि॑णी विपे॒ततुः॒ शिप्रे॒ वाजा॑य॒ हरि॑णी॒ दवि॑ध्वतः । प्र यत्कृ॒ते च॑म॒से मर्मृ॑ज॒द्धरी॑ पी॒त्वा मद॑स्य हर्य॒तस्यान्ध॑सः ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.96.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

जिस प्रकार खुवा होम के लिए नीचे गिरता है, उसी प्रकार इंद्र की हरे रंग की आंखें यज्ञ पर पड़ीं. इंद्र सोमरूप अन्न का भक्षण करने के लिए अपने हरे रंग के जबड़ों को गति देते हैं. शुद्ध चमस में वर्तमान नशीले एवं सुंदर सोमरस को पीकर घोड़े अपने शरीर को सचेत बनाते हैं. (९)

EN English Translation

Just as Khuwa falls down to the home, Indra's green eyes fall on the yagna. Indra Somrup speeds up his green jaws to devour the food. The horses make their bodies conscious by drinking the present intoxicating and beautiful somras in pure spoons. (9)

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