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ऋग्वेद

Mandal 10 • Sukta 97 • Mantra / Rik 12

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 10 • सूक्त 97 • ऋचा / मन्त्र 12

10.97.12

Mantra ID: 10.97.12

यस्यौ॑षधीः प्र॒सर्प॒थाङ्ग॑मङ्गं॒ परु॑ष्परुः । ततो॒ यक्ष्मं॒ वि बा॑धध्व उ॒ग्रो म॑ध्यम॒शीरि॑व ॥ (१२)

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ऋग्वेद मन्त्र 10.97.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ओषधियो! तुम जिसके अंगअंग एवं गांठगांठ में आश्रय लेती हो, उसके शरीर से रोग इस प्रकार दूर कर देती हो, जिस प्रकार शक्तिशाली राजा चोर को देश से निकाल देता है. (१२)

EN English Translation

O ladies! The disease is removed from the body of the one whose limbs and lumps you take shelter in such a way that the mighty king drives the thief out of the country. (12)

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