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10.99.11
अ॒स्य स्तोमे॑भिरौशि॒ज ऋ॒जिश्वा॑ व्र॒जं द॑रयद्वृष॒भेण॒ पिप्रोः॑ । सुत्वा॒ यद्य॑ज॒तो दी॒दय॒द्गीः पुर॑ इया॒नो अ॒भि वर्प॑सा॒ भूत् ॥ (११)
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ऋग्वेद मन्त्र 10.99.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
उशिज के पुत्र ऋजिश्वा ने इंद्र की स्तुतियों की सहायता से वज्र द्वारा विप्रु की गोशाला तुड़वाई थी. जब सोमरस निचोड़ने वाले तथा यज्ञकर्ता उशिज ने स्तुतियां कीं, तब इंद्र ने आगे बढ़ते अपने रूप द्वारा शत्रुनगरों को पराजित किया. (११)
EN English Translation
Ushija's son Rishishwa, with the help of Indra's praises, broke vipru's cowshed by Vajra. When Someras squeeze and yajnakar Ushij praised, Indra went ahead and defeated the enemy cities with his form. (11)