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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 1 • Mantra / Rik 15

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 1 • ऋचा / मन्त्र 15

2.1.15

Mantra ID: 2.1.15

त्वं तान्सं च॒ प्रति॑ चासि म॒ज्मनाग्ने॑ सुजात॒ प्र च॑ देव रिच्यसे । पृ॒क्षो यदत्र॑ महि॒ना वि ते॒ भुव॒दनु॒ द्यावा॑पृथि॒वी रोद॑सी उ॒भे ॥ (१५)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.1.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! तुम शक्ति द्वारा उन प्रसिद्ध देवों से मिलते एवं अलग हो जाते हो. हे सुंदर उत्पत्ति वाले अग्नि! तुम बल में सभी देवों से आगे हो जाओ. तुम्हारी ही शक्ति से यज्ञ में डाला गया अन्न शब्द करते हुए धरती और आकाश में फैल जाता है. (१५)

EN English Translation

O agni! You meet those famous gods by power and get separated. O agni with beautiful origin! You get ahead of all the gods in force. By your own power, the food poured into the yagna spreads to the earth and the sky while saying the word. (15)

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