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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 18 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 18 • ऋचा / मन्त्र 3

2.18.3

Mantra ID: 2.18.3

हरी॒ नु कं॒ रथ॒ इन्द्र॑स्य योजमा॒यै सू॒क्तेन॒ वच॑सा॒ नवे॑न । मो षु त्वामत्र॑ ब॒हवो॒ हि विप्रा॒ नि री॑रम॒न्यज॑मानासो अ॒न्ये ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.18.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

नवीन स्तुति रूपी वचनों के साथ इंद्र के रथ में हरि नामक अश्वों को इसलिए जोड़ा गया है कि इंद्र शीघ्र आ सकें. इस यज्ञ में बहुत से बुद्धिमान्‌ स्तोता हैं. हे इंद्र! दूसरे यजमान तुम्हें अधिक प्रसन्न नहीं कर सकेंगे. (३)

EN English Translation

With the words of new praise, the horses named Hari have been added to Indra's chariot so that Indra can come soon. There are many wise hymns in this yajna. O Indra! Other hosts won't be able to make you happier. (3)

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