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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 18 • Mantra / Rik 6

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 18 • ऋचा / मन्त्र 6

2.18.6

Mantra ID: 2.18.6

आशी॒त्या न॑व॒त्या या॑ह्य॒र्वाङा श॒तेन॒ हरि॑भिरु॒ह्यमा॑नः । अ॒यं हि ते॑ शु॒नहो॑त्रेषु॒ सोम॒ इन्द्र॑ त्वा॒या परि॑षिक्तो॒ मदा॑य ॥ (६)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.18.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! अस्सी, नब्बे एवं सौ हरि नामक अश्चों द्वारा चलकर हमारे सामने आओ. शुनहोत्र नामक पात्रों में तुम्हारे आनंद के लिए सोम रखा हुआ है. (६)

EN English Translation

O Indra! Walk before us by the ashes of eighty, ninety and hundred hari. In the characters called Shunhotra, som is kept for your enjoyment. (6)

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