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ऋग्वेद

Mandal 2 • Sukta 32 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 2 • सूक्त 32 • ऋचा / मन्त्र 4

2.32.4

Mantra ID: 2.32.4

रा॒काम॒हं सु॒हवां॑ सुष्टु॒ती हु॑वे श‍ृ॒णोतु॑ नः सु॒भगा॒ बोध॑तु॒ त्मना॑ । सीव्य॒त्वपः॑ सू॒च्याच्छि॑द्यमानया॒ ददा॑तु वी॒रं श॒तदा॑यमु॒क्थ्य॑म् ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 2.32.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मैं उत्तम स्तुतियों द्वारा आह्वान के योग्य राका देवी को बुलाता हूं. वह सुभगा हमारी पुकार सुनें एवं हमारा अभिप्राय स्वयं जान लें. वह छेदरहित सूई से हमारे कर्मो को बुनती हुई हमें वीर एवं बहुदानदाता पुत्र दें. (४)

EN English Translation

I call upon Raka Devi worthy of being invoked by the best of praises. Let that good listen to our call and know our meaning for yourself. She weaves our deeds with a holeless needle and gives us a brave and multi-donor son. (4)

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