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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 11 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 11 • ऋचा / मन्त्र 1

3.11.1

Mantra ID: 3.11.1

अ॒ग्निर्होता॑ पु॒रोहि॑तोऽध्व॒रस्य॒ विच॑र्षणिः । स वे॑द य॒ज्ञमा॑नु॒षक् ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.11.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

देवों का आह्वान करने वाले, पुरोहित एवं यज्ञ के विशेष द्रष्टा अग्नि क्रमिक रूप से यज्ञ जानते हैं. (१)

EN English Translation

Those who invoke the gods, the priests and the special seers of the yajna, the agni, know the yajna sequentially. (1)

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