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3.21.1
इ॒मं नो॑ य॒ज्ञम॒मृते॑षु धेही॒मा ह॒व्या जा॑तवेदो जुषस्व । स्तो॒काना॑मग्ने॒ मेद॑सो घृ॒तस्य॒ होतः॒ प्राशा॑न प्रथ॒मो नि॒षद्य॑ ॥ (१)
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ऋग्वेद मन्त्र 3.21.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे जातवेद! हमारा यह यज्ञ देवों के पास ले जाओ एवं इन हव्यों का सेवन करो. हे होता! यज्ञ में बैठकर तुम सबसे पहले चर्बी और घी की बूंदों को भली-भांति भक्षण करो. (१)
EN English Translation
O Jathaveda! Take this yajna of ours to the gods and consume these havyas. It was! Sitting in the yajna, first of all, eat the drops of fat and ghee well. (1)