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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 21 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 21 • ऋचा / मन्त्र 5

3.21.5

Mantra ID: 3.21.5

ओजि॑ष्ठं ते मध्य॒तो मेद॒ उद्भृ॑तं॒ प्र ते॑ व॒यं द॑दामहे । श्चोत॑न्ति ते वसो स्तो॒का अधि॑ त्व॒चि प्रति॒ तान्दे॑व॒शो वि॑हि ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.21.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! हम पशु के मध्य भाग से अत्यंत ओजपूर्ण चर्बी तुम्हें देते हैं. हे निवास प्रदान करने वाले अग्नि! त्वचा के ऊपर तुम्हारे उद्देश्य से जो बूंदें गिरती हैं, उन्हें प्रत्येक देव को प्रदान करो. (५)

EN English Translation

O agni! We give you extremely energetic fat from the middle part of the animal. O agni that provides the abode! The drops that fall for your purpose on top of the skin, provide them to each god. (5)

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