Popular:
ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 27 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 27 • ऋचा / मन्त्र 1

3.27.1

Mantra ID: 3.27.1

प्र वो॒ वाजा॑ अ॒भिद्य॑वो ह॒विष्म॑न्तो घृ॒ताच्या॑ । दे॒वाञ्जि॑गाति सुम्न॒युः ॥ (१)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 3.27.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ऋतुओ! मास, अर्धमास, देव, एवं गौ सब तुम्हारे यज्ञ के लिए समर्थ हैं. सुख की इच्छा करता हुआ यजमान देवों को प्राप्त करता है. (१)

EN English Translation

O seasons! The maas, the ardhamas, the gods, and the cow are all capable of your yajna. The host, desiring happiness, receives the gods. (1)

卐 HinduText AI