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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 29 • Mantra / Rik 12

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 29 • ऋचा / मन्त्र 12

3.29.12

Mantra ID: 3.29.12

सु॒नि॒र्मथा॒ निर्म॑थितः सुनि॒धा निहि॑तः क॒विः । अग्ने॑ स्वध्व॒रा कृ॑णु दे॒वान्दे॑वय॒ते य॑ज ॥ (१२)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.29.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मेधावी, शोभन मंथन से उत्पन्न एवं उत्तम स्थान में स्थापित अग्नि! हमारे यज्ञ को विघ्नरहित बनाओ एवं देवाभिलाषी यजमान के लिए देवों की पूजा करो. (१२)

EN English Translation

O meritorious, the agni born of shobhan manthan and set in the best place! Make our yajna hassle-free and worship the gods for the divine host. (12)

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