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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 29 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 29 • ऋचा / मन्त्र 4

3.29.4

Mantra ID: 3.29.4

इळा॑यास्त्वा प॒दे व॒यं नाभा॑ पृथि॒व्या अधि॑ । जात॑वेदो॒ नि धी॑म॒ह्यग्ने॑ ह॒व्याय॒ वोळ्ह॑वे ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.29.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे जातवेद अग्नि! हम हव्य वहन करने के निमित्त तुम्हें धरती के ऊपर एवं उत्तर वेदी के मध्य भाग में स्थापित करते हैं. (४)

EN English Translation

O Jativeda Agni! We set you up above the earth and in the middle part of the north altar in order to carry the wind. (4)

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