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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 31 • Mantra / Rik 14

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 31 • ऋचा / मन्त्र 14

3.31.14

Mantra ID: 3.31.14

मह्या ते॑ स॒ख्यं व॑श्मि श॒क्तीरा वृ॑त्र॒घ्ने नि॒युतो॑ यन्ति पू॒र्वीः । महि॑ स्तो॒त्रमव॒ आग॑न्म सू॒रेर॒स्माकं॒ सु म॑घवन्बोधि गो॒पाः ॥ (१४)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.31.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! मैं तुम्हारी महती एवं दान की कामना करता हूं. तुझ वृत्रहंता की सवारी के लिए बहुत सी घोड़ियां तुम्हारे पास आती हैं. तुझ विद्वान्‌ को हम महान्‌ और उत्तम हव्य पहुंचाते हैं. हे मघवन्‌! तुम स्वयं को हमारा रक्षक समझ लो. (१४)

EN English Translation

O Indra! I wish you dearness and charity. Many horses come to you for your ride. To your scholar we give great and excellent greetings. Oh, it's a maghwan! Consider yourself as our protector. (14)

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