Popular:
ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 33 • Mantra / Rik 13

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 33 • ऋचा / मन्त्र 13

3.33.13

Mantra ID: 3.33.13

उद्व॑ ऊ॒र्मिः शम्या॑ ह॒न्त्वापो॒ योक्त्रा॑णि मुञ्चत । मादु॑ष्कृतौ॒ व्ये॑नसा॒घ्न्यौ शून॒मार॑ताम् ॥ (१३)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 3.33.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

“हे नदियो! तुम्हारी लहरें जुए की रस्सी से नीची बहे. तुम्हारा जल रस्सियों को न छुए. पापरहित, कल्याण कर्म करने वाली एवं तिरस्कारहीन नदियां इस समय बढ़ें नहीं.” (१३)

EN English Translation

"O rivers! Your waves flowed down by the gambling rope. Don't touch your water ropes. Sinless, welfare and contemptless rivers should not grow at this time." (13)

卐 HinduText AI