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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 33 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 33 • ऋचा / मन्त्र 5

3.33.5

Mantra ID: 3.33.5

रम॑ध्वं मे॒ वच॑से सो॒म्याय॒ ऋता॑वरी॒रुप॑ मुहू॒र्तमेवैः॑ । प्र सिन्धु॒मच्छा॑ बृह॒ती म॑नी॒षाव॒स्युर॑ह्वे कुशि॒कस्य॑ सू॒नुः ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.33.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

विश्वामित्र बोले-“हे जलपूर्ण सरिताओ! मेरा सोम तैयार करने संबंधी वचन सुनकर थोड़ी देर के लिए रुक जाओ. कुशिक का पुत्र मैं महान्‌ स्तुति द्वारा अपनी रक्षा की इच्छा करता हुआ सरिता को विशेष रूप से बुलाता हूं.” (५)

EN English Translation

Vishwamitra said, "O watery saritas! Stop for a while by listening to my som preparation promise. Son of Kushik, I call Sarita specially, wishing to protect myself through the great praise." (5)

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