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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 36 • Mantra / Rik 1

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 36 • ऋचा / मन्त्र 1

3.36.1

Mantra ID: 3.36.1

इ॒मामू॒ षु प्रभृ॑तिं सा॒तये॑ धाः॒ शश्व॑च्छश्वदू॒तिभि॒र्याद॑मानः । सु॒तेसु॑ते वावृधे॒ वर्ध॑नेभि॒र्यः कर्म॑भिर्म॒हद्भिः॒ सुश्रु॑तो॒ भूत् ॥ (१)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.36.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! मरुतों के साथ सदा सर्वदा संगति की याचना करते हुए हमारे धनलाभ के लिए आकर इस सोम को सफल बनाओ. अपने महान्‌ कमो के कारण प्रसिद्ध इंद्र सोम निचोड़ने के प्रत्येक अवसर पर वृद्धिकारक हव्यों द्वारा बढ़े हैं. (१)

EN English Translation

O Indra! Always praying for fellowship with the maruts, come for our wealth and make this mon a success. Due to his great commo, the famous Indra Soma has been increased by the incremental human beings on every occasion of squeezing. (1)

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