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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 36 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 36 • ऋचा / मन्त्र 11

3.36.11

Mantra ID: 3.36.11

शु॒नं हु॑वेम म॒घवा॑न॒मिन्द्र॑म॒स्मिन्भरे॒ नृत॑मं॒ वाज॑सातौ । श‍ृ॒ण्वन्त॑मु॒ग्रमू॒तये॑ स॒मत्सु॒ घ्नन्तं॑ वृ॒त्राणि॑ सं॒जितं॒ धना॑नाम् ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.36.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

धनप्राप्ति वाले संग्राम में उत्साहपूर्ण, धनवान्‌, सकल विश्व के नेता, स्तुतियां सुनने वाले शत्रुओं के लिए भयंकर, युद्ध में राक्षसविनाशकारी एवं शत्रुओं के धन के विजेता इंद्र को हम रक्षा के लिए बुलाते हैं. (११)

EN English Translation

We call Indra, who is enthusiastic, rich, leader of the whole world, fierce for the enemies who hear praises, demon destroyer in war and winner of enemies' wealth. (11)

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