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3.36.8
ह्र॒दा इ॑व कु॒क्षयः॑ सोम॒धानाः॒ समी॑ विव्याच॒ सव॑ना पु॒रूणि॑ । अन्ना॒ यदिन्द्रः॑ प्रथ॒मा व्याश॑ वृ॒त्रं ज॑घ॒न्वाँ अ॑वृणीत॒ सोम॑म् ॥ (८)
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ऋग्वेद मन्त्र 3.36.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
जैसे तालाब में जल भरता है, उसी प्रकार इंद्र के पेट में सोम समा जाता है. इंद्र एक साथ बहुत से यज्ञों में उपस्थित रहते हैं. इंद्र ने पहले तो सोम का भक्षण किया, उसके बाद माध्यंदिन सवन में देवों के लिए उनका भाग बांट दिया. (८)
EN English Translation
Just as the pond is filled with water, so does the som in Indra's stomach. Indra is present in many yagnas at once. Indra first devoured Som, then distributed his share to the devas in the median savan. (8)