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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 39 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 39 • ऋचा / मन्त्र 7

3.39.7

Mantra ID: 3.39.7

ज्योति॑र्वृणीत॒ तम॑सो विजा॒नन्ना॒रे स्या॑म दुरि॒ताद॒भीके॑ । इ॒मा गिरः॑ सोमपाः सोमवृद्ध जु॒षस्वे॑न्द्र पुरु॒तम॑स्य का॒रोः ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.39.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

रात्रि से उत्पन्न होते ही सूर्यरूपी इंद्र ने प्रकाश का वरण किया. हम पाप से दूर एवं भयहीन स्थान में रहेंगे. हे सोम पीने वाले एवं सोम पाने में प्रमुख इंद्र! श्रुविनाशकारी एवं स्तुति करने वाले ऋत्विज्‌ की इन स्तुतियों को सुनो. (७)

EN English Translation

As soon as it arose from the night, the sun-like Indra chose light. We will stay away from sin and in a place without fear. O Mon drinker and the chief Indra in getting som! Listen to these praises of the cursing and praising ritwij. (7)

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