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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 51 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 51 • ऋचा / मन्त्र 11

3.51.11

Mantra ID: 3.51.11

यस्ते॒ अनु॑ स्व॒धामस॑त्सु॒ते नि य॑च्छ त॒न्व॑म् । स त्वा॑ ममत्तु सो॒म्यम् ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.51.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! हव्य अन्न के पश्चात्‌ तुम्हारे लिए जो सोम निचोड़ा गया है, उस में अपने शरीर को डुबो दो. सोमपान के योग्य तुमको वह सोमरस प्रसन्न करे. (११)

EN English Translation

O Indra! Dip your body in the som that has been squeezed for you after the havya grain. May that Somras please you worthy of sompan. (11)

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