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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 53 • Mantra / Rik 14

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 53 • ऋचा / मन्त्र 14

3.53.14

Mantra ID: 3.53.14

किं ते॑ कृण्वन्ति॒ कीक॑टेषु॒ गावो॒ नाशिरं॑ दु॒ह्रे न त॑पन्ति घ॒र्मम् । आ नो॑ भर॒ प्रम॑गन्दस्य॒ वेदो॑ नैचाशा॒खं म॑घवन्रन्धया नः ॥ (१४)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.53.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! अनार्य लोगों के जनपदों में गाएं तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं करेंगी. न वे सोमरस में मिलाने के लिए दूध देती हैं और न यज्ञपात्र को अपने दूध से दीप्त कर सकती हैं. हे मघवा! वे गाएं हमारे पास ले आओ और प्रमगंद का धन भी हमें दो. तुम नीच वंश वाले लोगों का धन हमें प्रदान करो. (१४)

EN English Translation

O Indra! Sing in the districts of the anirya people will do nothing for you. They do not give milk to be mixed in somras and can't light up the yajnapatra with their milk. Oh, this maghwa! They will sing, bring us and give us the wealth of the glory. You give us the wealth of the people of the lowly lineage. (14)

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