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ऋग्वेद

Mandal 3 • Sukta 54 • Mantra / Rik 21

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 3 • सूक्त 54 • ऋचा / मन्त्र 21

3.54.21

Mantra ID: 3.54.21

सदा॑ सु॒गः पि॑तु॒माँ अ॑स्तु॒ पन्था॒ मध्वा॑ देवा॒ ओष॑धीः॒ सं पि॑पृक्त । भगो॑ मे अग्ने स॒ख्ये न मृ॑ध्या॒ उद्रा॒यो अ॑श्यां॒ सद॑नं पुरु॒क्षोः ॥ (२१)

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ऋग्वेद मन्त्र 3.54.21 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! हमारा मार्ग सुगम एवं अन्न से पूर्ण हो. हे देवगण! मधुर जल से ओषधियों को सींचो. हे अग्नि! तुम्हारी मित्रता प्राप्त करके हमारा धन नष्ट न हो. हम धन एवं प्रभूत अन्न का स्थान प्राप्त करें. (२१)

EN English Translation

O agni! May our path be smooth and complete with food. O Gods! Irrigate the herbs with sweet water. O agni! Do not waste our money by getting your friendship. Let us get the place of wealth and rich food. (21)

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