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4.1.8
स दू॒तो विश्वेद॒भि व॑ष्टि॒ सद्मा॒ होता॒ हिर॑ण्यरथो॒ रंसु॑जिह्वः । रो॒हिद॑श्वो वपु॒ष्यो॑ वि॒भावा॒ सदा॑ र॒ण्वः पि॑तु॒मती॑व सं॒सत् ॥ (८)
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ऋग्वेद मन्त्र 4.1.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
देवों के दूत, सुनहरे रथ वाले एवं सुंदर ज्वालाओं से युक्त अग्नि सभी यज्ञस्थलों में जाने की अभिलाषा करते हैं. लाल घोड़ों वाले, परम सुंदर एवं कांतिशाली अन्न से पूर्ण वे घर के समान सदा रमणीय लगते हैं. (८)
EN English Translation
The messengers of the gods, the golden chariots and the agni with beautiful flames all wish to go to the yagnasthalas. Full of red-horse, the most beautiful and gritty food, they always look as delightful as a home. (8)