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4.12.6
यथा॑ ह॒ त्यद्व॑सवो गौ॒र्यं॑ चित्प॒दि षि॒ताममु॑ञ्चता यजत्राः । ए॒वो ष्व१॒॑स्मन्मु॑ञ्चता॒ व्यंहः॒ प्र ता॑र्यग्ने प्रत॒रं न॒ आयुः॑ ॥ (६)
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ऋग्वेद मन्त्र 4.12.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे पूजा के योग्य एवं निवास देने वाले अग्नि! जिस प्रकार तुमने बंधे हुए पैरों वाली गौरी नामक गाय को छुड़ाया था, उसी प्रकार हमें पाप से छुड़ा लो. हे अग्नि! अपने द्वारा बढ़ाई हुई हमारी आयु को और अधिक बढ़ाओ. (६)
EN English Translation
O agni worthy of worship and giving abode! Just as you redeemed a cow called Gauri with tied legs, so rescue us from sin. O agni! Increase our age by you and more. (6)