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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 28 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 28 • ऋचा / मन्त्र 5

4.28.5

Mantra ID: 4.28.5

ए॒वा स॒त्यं म॑घवाना यु॒वं तदिन्द्र॑श्च सोमो॒र्वमश्व्यं॒ गोः । आद॑र्दृत॒मपि॑हिता॒न्यश्ना॑ रिरि॒चथुः॒ क्षाश्चि॑त्ततृदा॒ना ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.28.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! तुम और इंद्र-दोनों ने अश्वों एवं गायों का समूह दान किया. तुमने पणियों द्वारा रोकी गई गायों को एवं उन पणियों की भूमियों को बल द्वारा मुक्त किया था. हे इंद्र एवं सोम! तुम दोनों शत्रुनाशकारियों ने जो किया, वह सत्य है. (५)

EN English Translation

Hey Mon! You and Indra both donated a group of horses and cows. You freed the cows stopped by the pangs and the lands of those men by force. O Indra and Mon! What you two enemies have done is the truth. (5)

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