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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 37 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 37 • ऋचा / मन्त्र 5

4.37.5

Mantra ID: 4.37.5

ऋ॒भुमृ॑भुक्षणो र॒यिं वाजे॑ वा॒जिन्त॑मं॒ युज॑म् । इन्द्र॑स्वन्तं हवामहे सदा॒सात॑मम॒श्विन॑म् ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.37.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे ऋभुओ! हम अत्यंत रूप से बढ़ने वाले धन, संग्राम में परम शक्तिशाली रक्षक तथा सदा दानशील, अश्वां से युक्त एवं इंद्र से संबंधित तुम्हारे गण को पुकारते हैं. (५)

EN English Translation

Hey, Lord! We call upon your people who are extremely powerful protectors in the growing wealth, the struggle, and always the giver, the one with the ashwas and belonging to Indra. (5)

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