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4.40.1
द॒धि॒क्राव्ण॒ इदु॒ नु च॑र्किराम॒ विश्वा॒ इन्मामु॒षसः॑ सूदयन्तु । अ॒पाम॒ग्नेरु॒षसः॒ सूर्य॑स्य॒ बृह॒स्पते॑राङ्गिर॒सस्य॑ जि॒ष्णोः ॥ (१)
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ऋग्वेद मन्त्र 4.40.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हम दधिक्रा देव की शीघ्र स्तुति करते हैं. समस्त उषाएं हमें यज्ञकर्म की प्रेरणा दें. हम जल, अग्नि, उषा, सूर्य, बृहस्पति एवं अंगिरापुत्र जिष्णु की स्तुति करेंगे. (१)
EN English Translation
We praise The Dalai God quickly. May all the ushas inspire us to perform yajnakarma. We will praise Jal, Agni, Usha, Sun, Jupiter and Angiraputra Jishnu. (1)