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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 49 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 49 • ऋचा / मन्त्र 2

4.49.2

Mantra ID: 4.49.2

अ॒यं वां॒ परि॑ षिच्यते॒ सोम॑ इन्द्राबृहस्पती । चारु॒र्मदा॑य पी॒तये॑ ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.49.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र एवं बृहस्पति! यह सोमरस पीने के निमित्त एवं तुम्हें प्रसन्नता देने के लक्ष्य से तुम्हारे मुंह में डाला जाता है. (२)

EN English Translation

O Indra and Jupiter! This somerus is put in your mouth for the purpose of drinking and to give you happiness. (2)

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