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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 49 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 49 • ऋचा / मन्त्र 5

4.49.5

Mantra ID: 4.49.5

इन्द्रा॒बृह॒स्पती॑ व॒यं सु॒ते गी॒र्भिर्ह॑वामहे । अ॒स्य सोम॑स्य पी॒तये॑ ॥ (५)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.49.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र एवं बृहस्पति! हम सोम निचुड़ जाने पर सोमरस पीने के लिए स्तुतियों द्वारा तुम दोनों को बुलाते हैं. (५)

EN English Translation

O Indra and Jupiter! We call you both by eulogy to drink someras when we go to Mon Nichur. (5)

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