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4.50.11
बृह॑स्पत इन्द्र॒ वर्ध॑तं नः॒ सचा॒ सा वां॑ सुम॒तिर्भू॑त्व॒स्मे । अ॒वि॒ष्टं धियो॑ जिगृ॒तं पुरं॑धीर्जज॒स्तम॒र्यो व॒नुषा॒मरा॑तीः ॥ (११)
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ऋग्वेद मन्त्र 4.50.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे बृहस्पति और इंद्र! तुम हमें बढ़ाओ. हमारे प्रति तुम्हारी दया भावना एक ही साथ हो. तुम हमारे यज्ञकर्म की रक्षा करो, हमारी बुद्धियों को जगाओ एवं हम यजमानों के शत्रुओं से युद्ध करो. (११)
EN English Translation
O Jupiter and Indra! You raise us. May your compassion for us be the same. You protect our yajna karma, awaken our intellects and fight against the enemies of us hosts. (11)