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4.50.3
बृह॑स्पते॒ या प॑र॒मा प॑रा॒वदत॒ आ त॑ ऋत॒स्पृशो॒ नि षे॑दुः । तुभ्यं॑ खा॒ता अ॑व॒ता अद्रि॑दुग्धा॒ मध्वः॑ श्चोतन्त्य॒भितो॑ विर॒प्शम् ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 4.50.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे बृहस्पति! तुम्हारे यज्ञ में आने वाले अश्व परम उच्च स्थान स्वर्ग से आते हैं. जिस प्रकार खोदे हुए कुएं में चारों ओर से धाराएं निकलती हैं, उसी प्रकार पत्थरों की सहायता से निचोड़े गए सोमरस स्तुतियों के साथ तुम्हें गीला बनावें. (३)
EN English Translation
O Jupiter! The horses that come to your yajna come from heaven, the highest place. Just as streams come out from all sides in a dug well, so make you wet with someras eulogies squeezed with the help of stones. (3)