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ऋग्वेद

Mandal 4 • Sukta 51 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 4 • सूक्त 51 • ऋचा / मन्त्र 9

4.51.9

Mantra ID: 4.51.9

ता इन्न्वे॒३॒॑व स॑म॒ना स॑मा॒नीरमी॑तवर्णा उ॒षस॑श्चरन्ति । गूह॑न्ती॒रभ्व॒मसि॑तं॒ रुश॑द्भिः शु॒क्रास्त॒नूभिः॒ शुच॑यो रुचा॒नाः ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 4.51.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

वे एक रूप वाली, समान व अनगिनत रंगों से युक्त उषाएं अपने दीप्तिशाली शरीर द्वारा प्रकाश फैलाती हुई एवं अपनी किरणों से महान्‌ अंधकार का नाश करती हुई विचरण करती हैं. (९)

EN English Translation

They are the same, uniform and with countless colours, spreading light through their radiant body and destroying the great darkness with their rays. (9)

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