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4.7.2
अग्ने॑ क॒दा त॑ आनु॒षग्भुव॑द्दे॒वस्य॒ चेत॑नम् । अधा॒ हि त्वा॑ जगृभ्रि॒रे मर्ता॑सो वि॒क्ष्वीड्य॑म् ॥ (२)
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ऋग्वेद मन्त्र 4.7.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे द्योतमान एवं मानवों द्वारा पूज्य अग्नि! तुम्हारा तेज कब गतिशील होगा? मनुष्य तुम्हें ग्रहण करते हैं. (२)
EN English Translation
O flame and worshiped by human beings! When will your speed be dynamic? Humans accept you. (2)