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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 20 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 20 • ऋचा / मन्त्र 4

5.20.4

Mantra ID: 5.20.4

इ॒त्था यथा॑ त ऊ॒तये॒ सह॑सावन्दि॒वेदि॑वे । रा॒य ऋ॒ताय॑ सुक्रतो॒ गोभिः॑ ष्याम सध॒मादो॑ वी॒रैः स्या॑म सध॒मादः॑ ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.20.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! ऐसी कृपा करो, जिससे हम प्रतिदिन तुम्हारी रक्षा प्राप्त करें. हे शोभन यज्ञ के स्वामी! ऐसा करो, जिससे हम धन पा सकें. यज्ञ कर सकें, गाएं पा सकें एवं पुत्र-पौत्रों के साथ प्रसन्न हो सकें. (४)

EN English Translation

O agni! Please be kind that we may protect you every day. O Lord of Shobhan Yajna! Do so that we can get money. You can perform yajna, sing, and be happy with your sons and grandsons. (4)

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