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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 34 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 34 • ऋचा / मन्त्र 8

5.34.8

Mantra ID: 5.34.8

सं यज्जनौ॑ सु॒धनौ॑ वि॒श्वश॑र्धसा॒ववे॒दिन्द्रो॑ म॒घवा॒ गोषु॑ शु॒भ्रिषु॑ । युजं॒ ह्य१॒॑न्यमकृ॑त प्रवेप॒न्युदीं॒ गव्यं॑ सृजते॒ सत्व॑भि॒र्धुनिः॑ ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.34.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

धनवान्‌ इंद्र जब शोभन धन वाले एवं सर्वसाधनसंपन्न दो लोगों को उत्तम गायों के लिए झगड़ता देखते हैं तो यज्ञ करने वाले की सहायता करते हैं. बादलों को कंपित करने वाले इंद्र यज्ञकर्ता को गाएं देते हैं. (८)

EN English Translation

Dhanvan Indra helps the one who performs the yajna when he sees two people with wealth and wealthy and wealthy fighting for the best cows. Indra, who vibrates the clouds, sings to the yajnakarta. (8)

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