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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 35 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 35 • ऋचा / मन्त्र 2

5.35.2

Mantra ID: 5.35.2

यदि॑न्द्र ते॒ चत॑स्रो॒ यच्छू॑र॒ सन्ति॑ ति॒स्रः । यद्वा॒ पञ्च॑ क्षिती॒नामव॒स्तत्सु न॒ आ भ॑र ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.35.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शूर इंद्र! चार वर्षो, तीन लोकों एवं पांच जनों से संबंधित जो तुम्हारी रक्षा है, वह हमें प्रदान करो. (२)

EN English Translation

O Shur Indra! Give us what is your protection concerning four years, three realms and five peoples. (2)

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