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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 35 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 35 • ऋचा / मन्त्र 8

5.35.8

Mantra ID: 5.35.8

अ॒स्माक॑मि॒न्द्रेहि॑ नो॒ रथ॑मवा॒ पुरं॑ध्या । व॒यं श॑विष्ठ॒ वार्यं॑ दि॒वि श्रवो॑ दधीमहि दि॒वि स्तोमं॑ मनामहे ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.35.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम हमारे पास आत्मीय बनकर आओ एवं अपनी उत्तम बुद्धि द्वारा हमारे रथ की रक्षा करो. हे अतिशय शक्तिशाली एवं दीप्त इंद्र! हम तुम्हारी कृपा से प्राप्त धन तुम्हें अर्पण करते हैं एवं तुम्हारी स्तुति करते हैं. (८)

EN English Translation

O Indra! Come to us as spiritual and protect our chariots with your best wisdom. O you very powerful and bright Indra! We offer you the wealth we receive from your grace and praise you. (8)

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