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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 46 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 46 • ऋचा / मन्त्र 8

5.46.8

Mantra ID: 5.46.8

उ॒त ग्ना व्य॑न्तु दे॒वप॑त्नीरिन्द्रा॒ण्य१॒॑ग्नाय्य॒श्विनी॒ राट् । आ रोद॑सी वरुणा॒नी श‍ृ॑णोतु॒ व्यन्तु॑ दे॒वीर्य ऋ॒तुर्जनी॑नाम् ॥ (८)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.46.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

देवपत्नियां हमारे हव्य को खाएं. इंद्राणी, अग्नायी, दीप्तियुक्त अश्विनी, रोदसी एवं वरुणानी देवी हमारा हव्य भक्षण करें. देवपत्नियों के मध्य ऋतुओं की देवी हमारा हव्य भक्षण करें. (८)

EN English Translation

Dev-wife eat our havya. Indrani, Agnayee, Deeptiyukta Ashwini, Rodsi and Varunani Devi should eat our havya. May the goddess of the seasons between the devas and wives eat our havya. (8)

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