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ऋग्वेद

Mandal 5 • Sukta 60 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 5 • सूक्त 60 • ऋचा / मन्त्र 2

5.60.2

Mantra ID: 5.60.2

आ ये त॒स्थुः पृष॑तीषु श्रु॒तासु॑ सु॒खेषु॑ रु॒द्रा म॒रुतो॒ रथे॑षु । वना॑ चिदुग्रा जिहते॒ नि वो॑ भि॒या पृ॑थि॒वी चि॑द्रेजते॒ पर्व॑तश्चित् ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 5.60.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे रुद्रपुत्र मरुतो! तुम बुंदकियों वाली प्रसिद्ध घोड़ियों द्वारा खींचे जाते हुए एवं शोभन द्वारों वाले रथों पर बैठते हो. हे अधिक बलसंपन्न मरुतो! जब तुम रथों पर बैठते हो, तब तुम्हारे भय से वन, धरती एवं पर्वत कांपने लगते हैं. (२)

EN English Translation

O Rudraputra Maruto! You sit on chariots with famous horses with bunks and adorned with gates. O more powerful Maruto! When you sit on the chariots, the forest, the earth and the mountains tremble because of your fear. (2)

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