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5.85.4
उ॒नत्ति॒ भूमिं॑ पृथि॒वीमु॒त द्यां य॒दा दु॒ग्धं वरु॑णो॒ वष्ट्यादित् । सम॒भ्रेण॑ वसत॒ पर्व॑तासस्तविषी॒यन्तः॑ श्रथयन्त वी॒राः ॥ (४)
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ऋग्वेद मन्त्र 5.85.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
वरुण जब वर्षारूपी दूध की अभिलाषा करते हैं तो वे धरती, अंतरिक्ष एवं स्वर्ग को गीला करते हैं. पर्वत बादलों द्वारा घेर लिए जाते हैं एवं शक्तिशाली मरुत् बादलों को शिथिल करते हैं. (४)
EN English Translation
When Varuna craves rainy milk, he wets the earth, space and heaven. The mountains are surrounded by clouds and relax the powerful desert clouds. (4)