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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 10 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 10 • ऋचा / मन्त्र 4

6.10.4

Mantra ID: 6.10.4

आ यः प॒प्रौ जाय॑मान उ॒र्वी दू॑रे॒दृशा॑ भा॒सा कृ॒ष्णाध्वा॑ । अध॑ ब॒हु चि॒त्तम॒ ऊर्म्या॑यास्ति॒रः शो॒चिषा॑ ददृशे पाव॒कः ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.10.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

काले मार्ग वाले अनिने ने उत्पन्न होकर अपनी दूर से दिखने वाली ज्योति द्वारा धरती- आकाश को भर दिया है. पवित्रकर्ता अन्नि रात्रि के महान्‌ अंधकार को अपनी किरणों से समाप्त करते हुए दिखाई देते हैं. (४)

EN English Translation

Anine, who has a dark path, has created and filled the earth and sky with its far-sighted light. The Holy One is seen ending the great darkness of the night with his rays. (4)

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