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6.2.11
अच्छा॑ नो मित्रमहो देव दे॒वानग्ने॒ वोचः॑ सुम॒तिं रोद॑स्योः । वी॒हि स्व॒स्तिं सु॑क्षि॒तिं दि॒वो नॄन्द्वि॒षो अंहां॑सि दुरि॒ता त॑रेम॒ ता त॑रेम॒ तवाव॑सा तरेम ॥ (११)
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ऋग्वेद मन्त्र 6.2.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे अनुकूल दीप्ति वाले एवं धरती-आकाश में वर्तमान अग्नि देव! तुम हमारी स्तुति देवों को भली प्रकार बताओ. हम स्तोताओं को शोभन गृह के साथ सुख दो. हम शत्रुओं को नष्ट करके पापों के पार जावें. तुम्हारी कृपा से हम शत्रु से छुटकारा पावें. (११)
EN English Translation
O God of favorable brightness and the present agni god in the earth-sky! Tell us our praise to the gods very well. May we give pleasure to the psalmists with Shobhan Griha. Let us destroy enemies and transcend sins. By Your grace, let us get rid of the enemy. (11)