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6.2.5
स॒मिधा॒ यस्त॒ आहु॑तिं॒ निशि॑तिं॒ मर्त्यो॒ नश॑त् । व॒याव॑न्तं॒ स पु॑ष्यति॒ क्षय॑मग्ने श॒तायु॑षम् ॥ (५)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 6.2.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे अग्नि! जो मनुष्य हमारी मंत्रयुक्त आहुति को समिधाओं द्वारा विस्तृत करता है, वह सौ वर्ष तक पुत्र-पौत्र युक्त गृह को पाता है. (५)
EN English Translation
O agni! The man who elaborates our mantra-filled offerings through committees finds the house with sons and grandsons for a hundred years. (5)