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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 2 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 2 • ऋचा / मन्त्र 7

6.2.7

Mantra ID: 6.2.7

अधा॒ हि वि॒क्ष्वीड्योऽसि॑ प्रि॒यो नो॒ अति॑थिः । र॒ण्वः पु॒री॑व॒ जूर्यः॑ सू॒नुर्न त्र॑य॒याय्यः॑ ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.2.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे प्रजाओं में स्तुत्य अग्नि! तुम हमें अतिथितुल्य प्रिय, नगर में वर्तमान हितसाधक के समान रमणीय एवं पुत्र के समान पालन करने योग्य हो. (७)

EN English Translation

O agni of praise in the people! You are able to follow us as a guest-like beloved, as delightful as the present stakeholder in the city and as a son. (7)

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