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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 21 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 21 • ऋचा / मन्त्र 3

6.21.3

Mantra ID: 6.21.3

स इत्तमो॑ऽवयु॒नं त॑त॒न्वत्सूर्ये॑ण व॒युन॑वच्चकार । क॒दा ते॒ मर्ता॑ अ॒मृत॑स्य॒ धामेय॑क्षन्तो॒ न मि॑नन्ति स्वधावः ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.21.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र ने ही ज्ञाननाशक एवं वृत्र द्वारा विस्तृत अंधकार को सूर्य के द्वारा प्रकाशवान्‌ बनाया है. हे बलशाली एवं मरणरहित इंद्र! तुम्हारे स्वर्ग के उद्देश्य से यज्ञ करने के इच्छुक लोग किसी की हिंसा नहीं करते. (३)

EN English Translation

It is Indra who has made the darkness of the sun light through the sun through the destroyer of knowledge and vrithra. O mighty and dieless Indra! Those who wish to perform yajna for the purpose of your heavenly pursuit do not violence to anyone. (3)

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