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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 29 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 29 • ऋचा / मन्त्र 3

6.29.3

Mantra ID: 6.29.3

श्रि॒ये ते॒ पादा॒ दुव॒ आ मि॑मिक्षुर्धृ॒ष्णुर्व॒ज्री शव॑सा॒ दक्षि॑णावान् । वसा॑नो॒ अत्कं॑ सुर॒भिं दृ॒शे कं स्व१॒॑र्ण नृ॑तविषि॒रो ब॑भूथ ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.29.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! भरद्वाज ऋषि ऐश्वर्य पाने के लिए तुम्हारे चरणों में अपनी सेवा भेंट करते हैं. तुम वज्रधारणकर्ता, शन्रुपराभवकारी एवं शक्ति द्वारा दक्षिणारूप धन स्तोताओं को देते हो. हे नेता इंद्र! तुम सबको दिखाई देने के विचार से प्रशंसनीय एवं नित्यगमन वाला रूप धारण करके सूर्य के समान घूमते हो. (३)

EN English Translation

O Indra! The sage Bharadwaja offers his service at your feet to get glory. You give money to the psalms in the form of the thunderbolt, the shuntroper, the struppers and the right form of shakti. O leader Indra! You move around like the sun, taking a plausible and routine form with the idea of being visible to all. (3)

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