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ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 37 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 37 • ऋचा / मन्त्र 2

6.37.2

Mantra ID: 6.37.2

प्रो द्रोणे॒ हर॑यः॒ कर्मा॑ग्मन्पुना॒नास॒ ऋज्य॑न्तो अभूवन् । इन्द्रो॑ नो अ॒स्य पू॒र्व्यः प॑पीयाद्द्यु॒क्षो मद॑स्य सो॒म्यस्य॒ राजा॑ ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 6.37.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हरे रंग का सोमरस हमारे यज्ञ में बहता है एवं पवित्र बनकर कलश में सीधी तरह जाता है. पुरातन, दीप्तिशाली एवं इस नशीले सोमरस के राजा इंद्र इस सोमरस को पिएं. (२)

EN English Translation

The green somras flow in our yagna and becomes holy and goes straight into the kalash. Indra, the king of the ancient, the radiant and intoxicating Somras, drink this somras. (2)

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