Popular:
ऋग्वेद

Mandal 6 • Sukta 52 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 6 • सूक्त 52 • ऋचा / मन्त्र 2

6.52.2

Mantra ID: 6.52.2

अति॑ वा॒ यो म॑रुतो॒ मन्य॑ते नो॒ ब्रह्म॑ वा॒ यः क्रि॒यमा॑णं॒ निनि॑त्सात् । तपूं॑षि॒ तस्मै॑ वृजि॒नानि॑ सन्तु ब्रह्म॒द्विष॑म॒भि तं शो॑चतु॒ द्यौः ॥ (२)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 6.52.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे मरुतो! जो व्यक्ति स्वयं को हमसे श्रेष्ठ मानता है अथवा हमारे द्वारा की हुई स्तुति की निंदा करता है, सारे तेज उसके बाधक हों तथा स्वर्ग उस यज्ञविरोधी को जलावे. (२)

EN English Translation

O Maruto! A person who considers himself superior to us or condemns the praise we have given, let all the brightness be his barrier and heaven should burn that anti-sacrificial. (2)

卐 HinduText AI